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इस्लाम में पडोसी के अधिकार

Written By इस्लामिक वेबदुनिया on शनिवार, 3 अक्तूबर 2009 | शनिवार, अक्तूबर 03, 2009

इस्लाम में पडोसी का पूरा खयाल रखने,उसके सुख दुख में भागीदार बनने और किसी भी तरह उसको दुख न पहुचाने की सख्त ताकीद की गई है। पडोस से बेपरवाह व्यक्ति को उसकी जिम्मेदारी का एहसास कराकर बताया गया है कि एक पडोसी के रूप में उसकी क्या-क्या जिम्मेदारियां हैं। पडोसी चाहे किसी भी मजहब का मानने वाला हो ,उसके प्रति ये पूरे हक अदा किए जाने चाहिए।

कुरआन और हदीस में पडोसियों के साथ अच्छे बर्ताव के हुक्म दिए गए हैं। इस्लाम के आखरी पैगम्बर मुहम्मद सल्लललाहो अलैहेवसल्लम ने फरमाया-जिसकी तकलीफों और शरारतों से पडोसी सुरक्षित नहीं,वह ईमानवाला नहीं है।पडोसी के साथ जुडाव लगाव और उसका हमदर्द बनने पर कितना जोर दिया गया है,इसका अंदाजा पैगम्बर की इस बात से होता है-पैगम्बर कहते हैं-’अल्लाह जिबी्रल फरिशते के जरिए मुझे पडोसी के बारे में बराबर ताकीद करते रहे,यहां तक कि मुझे खयाल होने लगा कि पडोसी को सम्पति का वारिस बना देंगे।‘ पडोसी का हर मामले में खयाल रखने पर जोर दिया गया है।खाने-पीने की चीजों में भी पडोसी को शामिल करने का हुक्म दिया गया है। हुजूर ने फरमाया-जो शख्स खुद पेट भरकर सोया और उसका पडोसी उसके पडोस में भूखा पडा रहा वह मुझ पर ईमान नहीं लाया।

इस्लाम में नमाज,रोजा,जकात आदि इबादतों के जरिए कर्मों को सुधारकर इंसानी भाईचारे,इंसानियत और इंसाफ पर जोर दिया गया है। नमाज,रोजा ,जकात को साधन और इनके असर से होने वाले अच्छे अमल को साध्य माना गया हैै। पडोसी के साथ अच्छे अमल के इस उदाहरण से इस बात को समझा जा सकता है- एक आदमी ने पैगम्बर मुहम्मद साहब से कहा कि फलां औरत नमाज पढती है,रोजे उपवास रखती है, खैरात गरीबों को मदद देती है लेकिन पडोसियों को गलत जुबानी से सताती रहती है। पैगम्बर ने कहा ऐसी औरत जहन्नुम में जाएगी। इसी तरह एक दूसरी औरत के बारे में उनसे कहा गया उसकी नमाज,रोजा कम है,खैरात भी कम देती है लेकिन उसके पडोसी इससे महफूज है। पैगम्बर ने कहा-वह औरत जन्नत में जाएगी। एक मौके पर मुहम्मद साहब ने कहा-पडोसी का बच्चा घर आ जाए तो उसके हाथ में कुछ न कुछ दो कि इससे मोहब्बत बढेगी। पडोसी का पडोसी से रिश्ता अच्छा और मजबूत बनाने के मकसद से कई हिदायतें दी गईं। हिदायत दी गई है कि पडोसी किसी भी तरह अपने पडोसी पर जुल्म न करे।

पैगम्बर साहब ने फरमाया-जिसने पडोसी को सताया उसने मेरे को सताया और जिसने मेरे को सताया उसने खुदा को सताया। इन सब बातों से जाहिर है कि कैसे पडोसी से पडोसी के रिश्ता को मजबूत करने की कोशिश की गई है । इसके पीछे मकसद है विशव बन्धुत्व की भावना को बढावा देना। क्योंकि भौगोलिक आधार पर देखा जाए तो सबसे छोटी इकाई पडोस ही है। पडोसों में भाईचारा होगा तो बस्ती या इलाके में भाईचारा होगा और फिर यह भाईचारा कस्बे,शहर,राज्य,देश से बढते-बढते बढेगा विशव बन्धुत्व की ओर।

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