World's First Islamic Blog, in Hindi विश्व का प्रथम इस्लामिक ब्लॉग, हिन्दी मेंدنیا کا سبسے پہلا اسلامک بلاگ ،ہندی مے ਦੁਨਿਆ ਨੂ ਪਹਲਾ ਇਸਲਾਮਿਕ ਬਲੋਗ, ਹਿੰਦੀ ਬਾਸ਼ਾ ਵਿਚ
आओ उस बात की तरफ़ जो हममे और तुममे एक जैसी है और वो ये कि हम सिर्फ़ एक रब की इबादत करें- क़ुरआन
Home » , » कैसी होगी मौत के बाद की जिंदगी?

कैसी होगी मौत के बाद की जिंदगी?

Written By Zeashan Zaidi on शुक्रवार, 14 मई 2010 | शुक्रवार, मई 14, 2010


यह सवाल हमेशा से इंसान को परेशान करता रहा है। दुनिया का हर मज़हब मौत के बाद जिंदगी का यकीन दिलाता है जबकि मज़हब से इतर लोगों का मानना है कि मौत के बाद जिस्म सड़ गल कर मिट्‌टी हो जाता है और उसके बाद दूसरी जिंदगी का सवाल ही नहीं उठता। 
इस्लाम इसका यकीन दिलाता है कि मौत के बाद जिंदगी है, और एक फैसले का दिन (कयामत) मुकर्रर है, उस दिन हर शख्स के आमाल देखे जायेंगे। वहाँ नेक अमल करने वालों के लिये अच्छी जगह यानि जन्नत व बुरे काम करने वालों के लिये बुरी जगह यानि जहन्नुम है।
कैसी होगी जन्नत या कैसा होगा जहन्नुम? इस बारे में हम कोई कल्पना नहीं कर सकते। इसलिये कि मौत के बाद की सारी चीजें इस दुनिया से पूरी तरह अलग होंगी। मिसाल के तौर पर दुनिया की आग आम तौर पर लाल और ज्यादा से ज्यादा सफेद होती है। लेकिन जहन्नुम की आग काले रंग की है। हम बस इतना समझ सकते हैं कि जन्नत इस दुनिया से इतनी बेहतर होगी और जहन्नुम इस दुनिया से इतना बदतर होगा जितना हम सोच ही नहीं सकते।
कयामत के दिन मैदान-ए-हश्र (जहाँ लोगों का फैसला होगा) की तरफ जहन्नुम को लाया जायेगा और उसके ऊपर एक पुल कायम किया जायेगा। जिसे पुले सिरात कहते हैं। उस पुल के ऊपर से हर व्यक्ति को गुजरना होगा। जो हक पर होंगे और जिनके कर्म अच्छे होगे वो उस पुल से गुजर कर जन्नत में दाखिल हो जायेंगे। और बुरे कर्म वाले बीच ही में गिर कर जहन्नुम की आग में घिर जायेंगे।
अब यहाँ कुछ सवाल लोगों के ज़हन में पैदा होते हैं।
1- जन्नत और जहन्नुम का फैसला मौत के बाद क्यों? इसी जिंदगी में क्यों नहीं? जिससे कि उसे देखकर दूसरे लोग सुधर जायें।
दरअसल अल्लाह बुरे इंसान को आखिरी साँस तक सुधरने का मौका देता है ताकि वह तौबा करके अच्छा इंसान बन जाये और उसके गुनाह माफ हो जायें। इसलिये इस जिंदगी में उसे कोई सजा नहीं दी जाती। इसी तरह मौत से पहले अगर उसे उसकी नेकियों का बदला मिल जाये तो बाद में जो वह नेकियां करेगा? उसका बदला उसे कैसे मिलेगा? कुछ नेकियां ऐसी भी होती हैं जिनका बदला इंसान को मरने के बाद भी मिलता रहता है। अगर किसी व्यक्ति ने किसी रेगिस्तानी इलाके में कुएं का निर्माण कराया है तो जब तक लोग उस कुएं से अपनी प्यास बुझाते रहेंगे, उसे इस नेकी का सवाब मिलता रहेगा। इसी तरह अगर उसकी औलाद में से किसी ने कोई अच्छा काम इस नीयत के साथ किसा कि उसका सवाब उसके माँ बाप को मिले तो ये नेकी भी उसके माँ बाप को मिलेगी। इसीलिये अल्लाह ने फैसले का वक्त कयामत के रोज का रखा है जब यह पृथ्वी व सूर्य सभी खत्म हो जायेंगे। उस वक्त नेकी या बदी के सारे एकाउंट बन्द हो जायेंगे।    
2- जन्नत और जहन्नुम का फैसला कयामत के दिन किया जायेगा। जब यह दुनिया खत्म हो जायेगी। तो सवाल ये है कि कयामत शायद लाखों साल बाद आने वाली है। तो अभी से उसकी फिक्र क्यों? और मौत के बाद इन लाखों सालों में इंसान की रूह अर्थात आत्मा क्या कर रही होगी? इस दौरान क्या वह सोयी हुई है या किसी और दुनिया में है?
ऐसा भी नहीं है कि सारे फैसले कयामत के ही रोज होंगे। जैसे ही किसी शख्स की मृत्यु होती है तो उसकी आत्मा एक दूसरे लोक में पहुंच जाती है जिसे बरज़ख का नाम दिया गया है। इस लोक में भी कयामत की ही तरह अच्छे लोगों के लिये जन्नत के मिस्ल अच्छी चीजें हैं और बुरे लोगों के लिये बुरी चीजें।    
बरज़ख की तरफ कुरआनी आयतों में कुछ इस तरह जिक्र आया है :
40.46 और अब तो कब्र में दोज़ख की आग है, कि वह लोग सुबह और शाम उसके सामने ला खड़े किये जाते हैं। और जिस दिन क़यामत बरपा होगी, (हुक्म होगा) फिरऔन के लोगों को सख्त से सख्त अजाब में झोंक दो।
यहां पर दोजख की आग बरज़ख में है इसलिये क्योंकि कयामत के दिन रात और दिन का मामला खत्म हो जायेगा। कयामत में न यह जमीन बाकी रहेगी न आसमान। 
11.106-108 तो जो लोग बदबख्त हैं वह दोज़ख में होंगे और उसी में उनकी हाय व चीख पुकार होगी। वह लोग जब तक आसमान व ज़मीन में हैं, हमेशा उसी में रहेंगे मगर जब तुम्हारा परवरदिगार चाहे। बेशक तुम्हारा परवरदिगार जो चाहता है कर ही डालता है।
चूंकि कयामत में न यह जमीन बाकी रहेगी न आसमान तो यह आयत बरजख की बात कर रही है। और जो लोग नेकबख्त हैं वह तो बहिश्त में होंगे जब तक आसमान व ज़मीन है वह हमेशा उसी में रहेंगे मगर जब तुम्हारा परवरदिगार चाहे।
यहाँ ये भी साफ हो रहा है कि जिन लोगों के गुनाह बरजख की आग में खत्म हो जायेगे वह कयामत के दिन जन्नत में भेज दिये जायेगे। और इसका उल्टा भी मुमकिन है। 
36. 25-26 मैं तो तुम्हारे परवरदिगार पर ईमान ला चुका हूं। मेरी बात सुनो और मानो। मगर उन लोगो ने उसे संगसार कर डाला। तब उसे अल्लाह का हुक्म हुआ कि बहिश्त में जा।
इस आयत में भी बरज़खी बहिश्त (जन्नत) की बात हो रही है। 
इस तरह की कई आयतें बरज़ख की बात करती हैं। बरजख मौत के बाद रूहों का घर है। 
किताबों में बरजख के दो हिस्से बताये गये हैं : (1) वादियुस्सलाम (सलामती की वादी) यहाँ अच्छी रूहें आराम से रहती हैं। और (2) वादिये बरहूत (भयानक वादी) यहाँ बुरी तकलीफ के साथ रूहें रहती हैं।
अगर कोई अच्छा व्यक्ति गुमराही का मौत मर गया। यानि उसे किसी ने सही रास्ता बताया ही नहीं। तो उसके लिये बरज़ख एक चाँस भी देता है कि कयामत के लिये अपने को सही राह पर लगा ले।
बरज़ख में बलात्कारी की सजा : किताबों में है कि अगर कोई व्यक्ति बलात्कार करता है तो उसकी कब्र में अजाब के तीन सौ दरवाजे खुल जाते हैं। हर दरवाजे से आग के साँप और बिच्छू बरामद होते हैं और वह कयामत तक जलता रहता है।
बरजख सिर्फ आत्मा के लिये है। पदार्थिक जिस्म से उसका कोई ताल्लुक नहीं है। बरजख में आत्मा को एक काल्पनिक जिस्म उसी तरह मिल जाता है जैसे कि सपने में होता है। जबकि कयामत का ताल्लुक जिस्म और आत्मा दोनों के लिये है। कयामत में इंसान का जिस्म उसी नुक्ते से दोबारा पैदा किया जायेगा जिस नुक्ते से पहली बार पैदा किया गया। और फिर उस जिस्म को उसकी आत्मा के साथ जोड़ दिया जायेगा।   
कयामत के दिन इंसान के होंठ सिल जायेंगे और हाथ पैर गवाही देंगे। कि उस इंसान ने पूरी जिंदगी कैसे कर्म किये। उस दिन हर व्यक्ति को हर उस व्यक्ति को बदला देना पड़ेगा जिसका हक उसने इस दुनिया में मारा था। यह बदला उसे अपनी नेकियों में से देना होगा।
अब एक सवाल और उठता है अल्लाह ने जन्नत और जहन्नुम बनाया ही क्यों? वह इंसान को भी फरिश्तों की तरह पैदा कर सकता था, जिनमें सिर्फ नेकी और अल्लाह की इबादत का ही विचार आता है। और बुरे विचारों से ये लोग दूर रहते हैं।
इसका जवाब ये है कि अल्लाह ने पहले जिन्नातों को बनाया और फिर इंसान को पैदा करने का इरादा किया। इंसान एक ऐसी मखलूक, जिसमें अच्छाई और बुराई के बारे में सोचने की ताकत हो। और जो अपने कर्मों को आजादी के साथ कर सकता हो। अल्लाह के इल्म से जिन्नातों और फरिश्तों को मालूम था कि इंसान का मिजाज क्या है। इसलिये जब अल्लाह ने कहा कि ज़मीन का मालिक इंसानों में से ही होगा तो इन लोगों ने एतराज जताया कि इंसान जमीन पर हमेशा तबाही और मारकाट मचाता रहेगा। ऐसे को जमीन का मालिक बनाना क्या उचित है? जवाब में अल्लाह ने कहा कि अपनी कमजोरियों के बावजूद वह अपने ज्ञान की वजह से तुम सबसे बेहतर है। सब ने अल्लाह के फैसले पर सर झुका दिया सिवाय इबलीस के जिसने अल्लाह के फैसले के बावजूद इंसान को अपने से नीचा समझा। उसने यह ठान लिया कि इंसान को नीचा दिखाने की हर मुमकिन कोशिश करेगा। उसकी सरकशी के लिये अल्लाह ने जहन्नुम की पैदाइश की और फिर उसकी न्यायप्रियता ने इबलीस को भी इतनी आजादी दे दी कि जिसको भी बहकाने में वह कामयाब हो जायेगा वह इंसान भी उसी के साथ जहन्नुम में भेज दिया जायेगा। इसलिये अब जो इंसान इबलीस के बहकाने में न आकर अपने को उससे बेहतर बना देता है उसके लिये जन्नत है और जो अपने को इबलीस से बदतर बना देता है उसके लिये जहन्नुम है। हर बेहतर इंसान अल्लाह के फैसले पर सहमति की मुहर लगाता है। और हर बदतर इंसान इबलीस के एतराज के लिये नया सुबूत बन जाता है। अब हमारे लिये यह फैसला करना है कि बेहतर बनकर अल्लाह के फैसले से सहमति दिखानी है और जन्नत में जाना है या बदतर बनकर इबलीस को और ज्यादा हंसने का मौका देना है और उसके साथ जहन्नुम में रहना है?
पुनश्च : सभी इंसान ज़मीन के मालिक नहीं हैं. हदीसों के अनुसार ज़मीन के मालिक मुहम्मद (स.अ.) व आले मुहम्मद हैं.
Share this article :

24 comments:

Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…

आपने बहुत अच्‍छी जानकारी पेश की है, मैं किसी किताब मैं आज तक यह तो न पढ सका कि जन्‍नत में 72 हूरें मिलेंगी, पढ लेता तो भी उनके खयाल से अधिक वहां का अजाब ही याद रहता, मुझे लगता है हमें वहां मिलने वाली नेमतों से ज्‍यादा वहां का अजाब अच्‍छे काम के लिये प्रेरित करता है मैं भी बस यह सोच के कुछ अच्‍छा करने और बुराई से बचने की कोशिश करता हूँ कि अल्‍लाह मुझे दोजख की आग से बचाये

सलीम ख़ान ने कहा…

कयामत में इंसान का जिस्म उसी नुक्ते से दोबारा पैदा किया जायेगा जिस नुक्ते से पहली बार पैदा किया गया। और फिर उस जिस्म को उसकी आत्मा के साथ जोड़ दिया जायेगा............................

Shah Nawaz ने कहा…

ईश्वर ने इन्साफ का दिन इसलिए तय किया है ताकि इन्साफ सबके सामने हो और दूसरी बात यह है कि कुछ कर्म इंसान ऐसा करते हैं जिनका पाप या पुन्य इस दुनिया के समाप्त होने तक बढ़ता रहता है.

जैसे कि जिस इंसान ने पहली बार किसी दुसरे इंसान की अकारण हत्या की होगी, तो उसके खाते में जितने भी इंसानों कि हत्या होगी सबका पाप लिखा जायेगा. क्योंकि उसने क़यामत तक के इंसानों को कुकर्म का एक नया रास्ता बताया. इसी तरह अगर कोई भलाई का काम किया जैसे कि पानी पीने के लिए प्याऊ बनाया तो जब तक वह प्याऊ है, तब तक उसका पुन्य अमुक व्यक्ति को मिलता रहेगा, चाहे वह कब का मृत्यु को प्राप्त हो गया हो. या फिर कोई किसी एक व्यक्ति को भलाई की राह पर ले कर आया, तो जो व्यक्ति भलाई कि राह पर आया वह आगे जितने भी व्यक्तियों को भलाई कि राह पर लाया और भले कार्य किये, उन सभी के अच्छे कार्यो का पुन्य पहले व्यक्ति को और साथ ही साथ सम्बंधित व्यक्तियों को भी पूरा पूरा मिलता रहेगा, यहाँ तक कि इस पृथ्वी के समाप्ति का दिन आ जाये.

Shah Nawaz ने कहा…

[21:47] "और हम वजनी, अच्छे न्यायपूर्ण कार्यो को इन्साफ के दिन (क़यामत) के लिए रख रहे हैं. फिर किसी व्यक्ति पर कुछ भी ज़ुल्म न होगा, यद्दपि वह (कर्म) राइ के दाने ही के बराबर हो, हम उसे ला उपस्थित करेंगे. और हिसाब करने के लिए हम काफी हैं."

Shah Nawaz ने कहा…

बहुत से पाप और पुन्य ऐसे होते हैं जिनका सम्बन्ध दुसरे व्यक्ति या व्यक्तियों से होता है. इसलिए "इन्साफ के दिन" उन सभी लोगो का इकठ्ठा होना ज़रूरी है. जब इन्साफ होगा तब ईश्वर गवाह भी पेश करेगा. कई बार तो हमारे शरीर के अंग ही बुरे कर्मो के गवाह होंगे.

जिस व्यक्ति ने पहली बार कोई "पाप" किया होगा, तो उस "पाप" को अमुक व्यक्ति कि बाद जितने भी लोग करेंगे उन सभी के पापो की सजा उस पहले व्यक्ति को भी होगी, इसलिए धरती के आखिरी पापी तक की पेशी वहां होगी.

Shah Nawaz ने कहा…

उदहारण स्वरुप अगर किसी व्यक्ति ने दुसरे व्यक्ति की हत्या के इरादे से किसी सड़क पर गड्ढा खोदा और उसमें कई और व्यक्ति गिर कर मर गए तो उसके इस पाप के लिए जितने व्यक्तियों की मृत्यु होगी उन सभी का पाप गड्ढा खोदने वाले व्यक्ति पर होगा. ऐसे ही अगर किसी ने कोई बुरा रास्ता किसी दुसरे व्यक्ति को दिखाया तो जब तक उस रास्ते पर चला जायेगा, अर्थात दूसरा व्यक्ति तीसरे को, फिर दूसरा और तीसरा क्रमशः चोथे एवं पांचवे को तथा दूसरा, तीसरा, चोथा एवं पांचवा व्यक्ति मिलकर आगे जितने भी व्यक्तियों को पाप का रास्ता दिखेंगे उसका पाप पहले व्यक्ति को भी मिलेगा, पहला व्यक्ति सभी के चलने का जिम्मेदार होगा. क्योंकि उसी ने वह रास्ता दिखाया है. और इस ज़ंजीर में से जो भी व्यक्ति जानबूझ कर और लोगो को पाप के रास्ते पर डालेगा वह भी उससे आगे के सभी व्यक्तियों के पापो का पूरा पूरा भागीदार होगा.

वह अगर बुराई की कोई राह दुसरे को दिखता ही नहीं तो दूसरा व्यक्ति तीसरे और चोथे व्यक्तियों तक वह बुराई पहुंचाता ही नहीं. इसलिए उनका इकट्ठे न्याय करना ही सही है.

ठीक यही क्रम अच्छाई की राह दिखने वाले व्यक्ति के लिए है. उसको भी उसी क्रम में पुन्य प्राप्त होता रहेगा. क्या तुम यह कहना चाहते हो की अगर किसी व्यक्ति ने पूजा करने के लिए मंदिर का निर्माण किया तो उसके मरने के बाद उसका पुन्य समाप्त हो जायेगा? जब तक उस मंदिर के द्वारा पुन्य के काम होते रहेंगे, मंदिर का निर्माण करवाने वाले को पुन्य मिलता रहेगा.

Dr. Ayaz ahmad ने कहा…

बहुत अच्छी पोस्ट ज़ीशान ज़ैदी साहब

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

इस्लाम इसका यकीन दिलाता है कि मौत के बाद जिंदगी है, और एक फैसले का दिन (कयामत) मुकर्रर है, उस दिन हर शख्स के आमाल देखे जायेंगे। वहाँ नेक अमल करने वालों के लिये अच्छी जगह यानि जन्नत व बुरे काम करने वालों के लिये बुरी जगह यानि जहन्नुम है।


कासमी साहब का मेरी तरफ से भी हमारी अन्‍जुमन में स्‍वागत है

Anjum Sheikh ने कहा…

मैंने अपने ब्लॉग पर एक लेख लिखा है, आप से गुज़ारिश है की अगर आपको लेख पसंद आए तो उस पर अपना कमेंट्स और वोट ज़रूर दें. शुक्रिया.


http://anjumsheikh.blogspot.com/2010/05/blog-post.html

Anjum Sheikh ने कहा…

मैं आपके ब्लॉग पर वोट देना चाहती थी, लेकिन ब्लोग्वानी मेरे पासवर्ड को गलत बता देता है, जब में पासवर्ड पता करती हूँ तो ब्लोग्वानी वही पासवर्ड ईमेल पर भेजता है, लेकिन वही पासवर्ड कॉपी पेस्ट करने पर भी ब्लोग्वानी उसे गलत बताता है. अजीब मुश्किल है, क्या किसी को इसका हल पता है?

Anjum Sheikh ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

jaankaari he. baad me kyaa hotaa he...kyo hotaa he...magar he rahasyamayi hi..

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice Post
वेद और कुरआन

ईश्वर एक है

तो उसने जब कभी किसी ऋषि के अन्तःकरण पर सत्य प्रकट किया तो उसे जन्म और मृत्यु के विषय में स्पष्ट ज्ञान दिया । जन्म और मृत्यु के बीच की अवधि को हम जीवन के नाम से जानते हैं लेकिन जीवन तो मृत्यु के बाद भी है बल्कि यह कहना ज़्यादा सही होगा कि वास्तव में जीवन तो है ही मृत्यु के बाद । आदमी अपने मन में भोग की जो कामनाएं लिए रहता है वे यहां पूरी कब हो पाती हैं ?


और जो लोग पूरी करने की कोशिश करते हैं उनके कारण समाज में बहुत सी ख़राबियां फैल जाती हैं । वजह यह नहीं है कि भोग कोई बुरी बात है । सीमाओं के बन्धन में रहते हुए तो भोग की यहां भी अनुमति है और जीवन का व्यापार उसी से चल भी रहा है लेकिन अनन्त भोग के लिए अनन्त भोग की सामथ्र्य और अनन्त काल का जीवन चाहिये और एक ऐसा लोक भी चाहिये जहां वस्तु इच्छा मात्र से ही प्राप्त हो जाये और उसका कोई भी बुरा प्रभाव किसी अन्य पर न पड़ता हो । प्रत्येक ईशवाणी मनुष्य के मन में बसी हुई इस चिर अभिलिषित इच्छा के बारे में ज़रूर बताती है ।


पवित्र कुरआन में इसका बयान साफ़ साफ़ आया है लेकिन वेदों से भी यह ग़ायब नहीं किया जा सका है बल्कि इनका बयान तो बाइबिल में भी मिलता है ।


इस बयान का मक़सद सिर्फ़ यह है कि आदमी दुनिया के सुख भोगने के लिए बेईमानी और जुल्म का तरीका अख्ितयार न करे बल्कि ईमानदारी से अपना फ़र्ज़ पूरा करे चाहे इसके लिए उसे प्राप्त सुखों का भी त्याग करना पड़े या फिर मरना ही क्यों न पड़े ?


क्योंकि अगर वह अपने फ़र्ज़ को पूरा करते हुए मर भी गया तब भी उसका मालिक उसे अमर जीवन और सदा का भोग देगा । यही विश्वास आदमी के लड़खड़ाते क़दमों को सहारा देता है और उसके दिल से दुनिया का लालच और मौत का ख़ौफ़ दूर कर देता है ।


यत्रानन्दाश्च मोदाश्च मुदः प्रमुद आसते ।


कामस्य यत्राप्ताः कामास्तत्र माममृतं कृधीनन्द्रायंन्दां परि स्रव ।।


-ऋग्वेद , 9-113-11


मुझे उस लोक में अमरता प्रदान कर , जहां मोद , मुद और प्रमुद तीन प्रकार के आनन्द मिलते हैं और जहां सभी चिर अभिलिषित कामनाएं इच्छा होते ही पूर्ण हो जाती हैं ।


मोद , मुद और प्रमुद ये तीन आनन्द जिनका उल्लेख इस मंत्र में किया गया है संभोग से संबंधित आनन्द हैं और विशेषकर ‘प्रमुद‘ तो वेदों में संभोग के आनन्द के लिए ही आता है । इससे मालूम हुआ कि स्वर्ग में लोगों को पत्नियां भी मिलेंगी । इसका प्रमाण दूसरे वर्णनों से भी मिलता है ।


भोजा जिग्युः सुरभिं योनिमग्ने भोजा जिग्युर्वध्वंवया सुवासाः ।


भोजा जिग्युरन्तः पेयं सुराया भोजा जिग्युर्ये अहूताः प्रयन्ति ।


ऋग्वेद, 10-107-9


दान करने वालों ने पहले सुखकर स्थल अर्थात स्वर्ग को प्राप्त किया है ।


फिर अच्छे सुन्दर वस्त्र वाली सुन्दर स्त्रियां और तेज़ शराब के जाम को ।

Mahak ने कहा…

@ zeashaan जी

अच्छा लेख है

आप मेरे ब्लॉग पर आये इसके लिए बहुत-२ शुक्रिया. आगे भी आते रहिएगा,आपका सदैव स्वागत है.

धन्यवाद

महक

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

आभार।
कैसे लिखेगें प्रेमपत्र 72 साल के भूखे प्रहलाद जानी।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ Zeashan Zaidi Bhai ! ye article apka article padhne ke baad hi likha tha aur maqsad bhi yahi tha jo apne bayan kiya hai .
ग़ज़ल


आदमी आदमी को क्या देगा


जो भी देगा ख़ुदा देगा ।


मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है


क्या मेरे हक़ में फ़ैसला देगा ।


ज़िन्दगी को क़रीब से देखो


इसका चेहरा तुम्हें रूला देगा ।


हमसे पूछो दोस्त क्या सिला देगा


दुश्मनों का भी दिल हिला देगा ।


इश्क़ का ज़हर पी लिया ‘फ़ाक़िर‘


अब मसीहा भी क्या दवा देगा ।

http://vedquran.blogspot.com/2010/05/hell-n-heaven-in-holy-scriptures.html

इस्लामिक वेबदुनिया ने कहा…

जीशान साहब ने एक अच्छे विषय को बेहतर अंदाज में पेश करने की अच्छी कोशिश की है।
इंसानी फितरत के लिहाज से भी देखा जाए तो इंसानी फितरत भी जन्नत और दोजख के होने की जरूरत महसूस करती है। क्योंकि यह दुनिया पर्याप्त नहीं है इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा फल देने के लिए। जिसने कई कुएं खुदवाए और वह उसी दिन मर गया तो उसके पुण्य का क्या होगा? स्वाभाविक है मौत के बाद की जन्नत में उसको पूरा-पूरा बदला मिलेगा। और हिटलर को भी दुनिया का कानून कितनी सजा दे सकता था? ज्यादा से ज्यादा फांसी? कमाल है दुनियावी कानून में एक-दो शख्स को मारने पर भी फांसी और करोडों लोगों को मारने पर भी सिर्फ वही फांसी? जबकि मौत के बाद बदले वाली सोच हमें बताती है कि ऐसे शख्स को कई-कई बार दोजख की आग में जलाया जाएगा और उसे मौत नहीं आएगी। यानी किए गए पाप की पूरी-पूरी सजा।

इस्लामिक वेबदुनिया ने कहा…

कई लोग कहते हैं कि कर्मों का हिसाब इसी दुनिया में मिल जाता है। स्वर्ग और नरक यहीं पर है। जबकि ऐसा नहीं है। यह सच है कि अच्छे और बुरे कर्मों का कुछ बदला ईश्वर हमें इस दुनिया में भी देता है लेकिन यह कुछ बदला ही है,अच्छे कर्म वालों को प्रेरित करने के लिए और बुरे कर्म करने वालों को खबरदार करने के लिए।
आप खुद ठण्डे दिमाग से सोचें अगर आप कहीं नौकरी करते हैं तो आपका फाइनल हिसाब तो तभी होगा जब आप उस सेवा से निवृत हो जाएंगे। हर माह और साल में मिलने वाला तो आपकी तनख्वाह और बोनस है। जब आपकी नौकरी की अवधि ही पूरी नहीं हुई तो भला आपका पूरा हिसाब कैसे हो सकता है?
ठीक इसी तरह इंसान की पूरी जिंदगी उस ईश्वर की चाकरी है। और इस चाकरी का पूरा हिसाब तब ही होना है जब उस इंसान के कर्मों का खाता दुनिया के अकाउंट से बन्द ना हो जाए। यानी कयामत के बाद। अगर इंसान की यह चाकरी
ईश्वरीय आदेश जो पैगम्बरों और किताबों के जरिए आते रहे हैं (आखरी आदेश कुरआन के रूप में पैगम्बर मुहम्मद साहब पर अवतरित हुआ है) के मुताबिक होती है तो उसे स्वर्ग मिलता है और ईश्वरीय आदेश की बगावत करने वालों को नरक की आग में जलना पड़ता है।

searchtruepath ने कहा…

aalmae barzhak ke mutaalik ye video aur iske parts ko dekhe aur sune http://www.youtube.com/watch?v=BsxRK5cGuQM&playnext_from=TL&videos=P_Qc43k6tIU

searchtruepath ने कहा…

aalmae barzhak ke mutaalik ye video aur iske parts ko dekhe aur sune http://www.youtube.com/watch?v=BsxRK5cGuQM&playnext_from=TL&videos=P_Qc43k6tIU

Shah Nawaz ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन और ज़बरदस्त बात कही है आपने. आपकी बातें सोचने को मजबूर करती हैं, यह बात बिलकुल सही है कि इंसान की ज़िन्दगी में उसके कर्मो का पूरा फल मिल ही नहीं सकता है. जिसने लोगो की प्यास बुझाने के लिए कुआं खोदा है, जब तक लोगो की प्यास बुझती रहेगी उसका पुन्य उस कुँए को बनवाने वाले को अवश्य ही मिलना चाहिए, अगर नहीं मिलता है तो यह उसके साथ अन्याय है. और ईश्वर कभी भी अन्यायी नहीं हो सकता है.

बुरके वाली ने कहा…

आजा मेरे बुरके में घुस जा! मौज करा दूं. पता है- ताया, चाचा, मामा, खलेरे, फुफेरे, चचेरे, ममेरे और भी न जाने कौन-कौन से "भाई जान" बुरके में घुसकर मज़े लुटते हैं

safat alam taimi ने कहा…

बुरके वाली साहब! जोश में होश मत खोओ...खूब विरोद्ध करो... ऐसा न हो कि हमारे भारतवासि तुम्हारी करतूतों से पूरी तरह अवगत हो जाएं जैसा कि अभी तुम्हारे आतंक का पर्दा-फाश हो रहा है।

AlbelaKhatri.com ने कहा…

aapka aalekh bahut khoob...........

bahut achha laga......

shukriya.........

"हमारी अन्जुमन" को ज़यादा से ज़यादा लाइक करें !

Read All Articles, Monthwise

Blogroll

Interview PART 1/PART 2

Popular Posts

Followers

Blogger templates

Google+ Followers

Labels

 
Support : Creating Website | Johny Template | Mas Template
Proudly powered by Blogger
Copyright © 2011. हमारी अन्‍जुमन - All Rights Reserved
Template Design by Creating Website Published by Mas Template