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गैर-मुसलमानों के साथ संबंधों के लिए इस्लाम के अनुसार दिशानिर्देश

Written By Shah Nawaz on बुधवार, 14 अप्रैल 2010 | बुधवार, अप्रैल 14, 2010

हमें विस्तार से पता होना चाहिए कि इस्लाम के अनुसार मुसलमानों को गैर-मुसलमानों के साथ कैसे संबंध रखने चाहिए और कैसे उनके साथ इस्लामी शरी'अह के अनुसार जीवन व्यतीत करना चाहिए?


सब तारीफें अल्लाह के ही लिए हैं.
पहली बात तो यह कि इस्लाम दया और न्याय का धर्म है. इस्लाम के लिए इस्लाम के अलावा अगर कोई और शब्द इसकी पूरी व्याख्या कर सकता है तो वह है न्याय".

मुसलमानों को आदेश है कि ग़ैर-मुसलमानों को ज्ञान, सुंदर उपदेश तथा बेहतर ढंग से वार्तालाप से बुलाओ.  ईश्वर कुरआन में कहता है (अर्थ की व्याख्या):


[29: 46] और किताबवालों से बस उत्तम रीति से वाद-विवाद करो - रहे वे लोग जो उनमे ज़ालिम हैं, उनकी बात दूसरी है. और कहो: "हम ईमान लाए उस चीज़ पर जो हमारी और अवतरित हुई और तुम्हारी और भी अवतरित हुई. और हमारा पूज्य और तुम्हारा पूज्य अकेला ही है और हम उसी के आज्ञाकारी हैं."

[9:6] और यदि मुशरिकों (जो ईश्वर के साथ किसी और को भी ईश्वर अथवा शक्ति मानते हैं) में से कोई तुमसे शरण मांगे, तो तुम उसे शरण दे दो, यहाँ तक कि वह अल्लाह की वाणी सुन ले. फिर उसे उसके सुरक्षित स्थान पर पंहुचा दो; क्यों वे ऐसे लोग हैं, जिन्हें ज्ञान नहीं है.

इस्लाम यह अनुमति नहीं देता है कि एक मुसलमान किसी भी परिस्थिति में किसी गैर-मुस्लिम (जो इस्लाम के प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार नहीं करता) के साथ बुरा व्यवहार करे. इसलिए मुसलमानों को किसी ग़ैर-मुस्लिम के खिलाफ आक्रमण की, या डराने की, या आतंकित करने, या उसकी संपत्ति गबन करने की, या उसे उसके सामान के अधिकार से वंचित करने की, या उसके ऊपर अविश्वास करने की, या उसे उसकी मजदूरी देने से इनकार करने की, या उनके माल की कीमत अपने पास रोकने की जबकि उनका माल खरीदा जाए. या अगर साझेदारी में व्यापार है तो उसके मुनाफे को रोकने की अनुमति नहीं है.

इस्लाम के अनुसार यह मुसलमानों पर अनिवार्य है गैर मुस्लिम पार्टी के साथ किया करार या संधियों का सम्मान करें. एक मुसलमान अगर किसी देश में जाने की अनुमति चाहने के लिए नियमों का पालन करने पर सहमत है (जैसा कि वीसा इत्यादि के समय) और उसने पालन करने का वादा कर लिया है, तब उसके लिए यह अनुमति नहीं है कि उक्त देश में शरारत करे, किसी को धोखा दे, चोरी करे, किसी को जान से मार दे अथवा किसी भी तरह की विनाशकारी कार्रवाई करे. इस तरह के किसी भी कृत्य की अनुमति इस्लाम में बिलकुल नहीं है.

जहाँ तक प्यार और नफरत की बात है, मुसलमानों का स्वाभाव ग़ैर-मुसलमानों के लिए उनके कार्यो के अनुरूप अलग-अलग होता है. अगर वह ईश्वर की आराधना करते हैं और उसके साथ किसी और को ईश्वर अथवा शक्ति नहीं मानते तो इस्लाम उनके साथ प्रेम के साथ रहने का हुक्म देता है. और अगर वह किसी और को ईश्वर का साझी मानते हैं, या ईश्वर पर विश्वास नहीं करते, या धर्म के प्रति शत्रुतापूर्ण हैं और ईश्वर की सच्चाई से नफरत करते है, तो ऐसा करने के कारणवश उनके लिए दिल में नफरत का भाव आना व्यवहारिक है.

[अल-शूरा 42:15, अर्थ की व्याख्या]:
"और मुझे तुम्हारे साथ न्याय का हुक्म है. हमारे और आपके प्रभु एक ही है. हमारे साथ हमारे कर्म हैं और आपके साथ आपके कर्म."

इस्लाम यह अनुमति अवश्य देता  है कि अगर ग़ैर-मुस्लिम मुसलमानों के खिलाफ युद्ध का एलान करें, उनको उनके घर से बेदखल कर दें अथवा इस तरह का कार्य करने वालो की मदद करें, तो ऐसी हालत में मुसलमानों को अनुमति है ऐसा करने वालो के साथ युद्ध करे और उनकी संपत्ति जब्त करें.

[60:8] अल्लाह तुम्हे इससे नहीं रोकता है कि तुम उन लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करो और उनके साथ न्याय करो, जिन्होंने तुमसे धर्म के मामले में युद्ध नहीं किया और ना तुम्हे तुम्हारे अपने घर से निकाला. निस्संदेह अल्लाह न्याय करने वालों को पसंद करता है.

[60:9] अल्लाह तो तुम्हे केवल उन लोगो से मित्रता करने से रोकता है जिन्होंने धर्म के मामले में तुमसे युद्ध किया और तुम्हे तुम्हारे अपने घरों से निकला और तुम्हारे निकाले जाने के सम्बन्ध में सहायता की. जो लोग उनसे मित्रता करें वही ज़ालिम हैं.


क्या इस्लाम काफिरों का क़त्ल करने का हुक्म देता है?

कुछ लोग इस्लाम के बारे में भ्रान्तिया फ़ैलाने के लिए कहते हैं, कि इस्लाम में गैर-मुसलमानों को क़त्ल करने का हुक्म है. इस बारें में ईश्वर के अंतिम संदेष्ठा, महापुरुष मौहम्मद (स.) की कुछ बातें लिख रहा हूँ, इन्हें पढ़ कर फैसला आप स्वयं कर सकते हैं:

"जो ईश्वर और आखिरी दिन (क़यामत के दिन) पर विश्वास रखता है, उसे हर हाल में अपने मेहमानों का सम्मान करना चाहिए, अपने पड़ोसियों को परेशानी नहीं पहुंचानी चाहिए और हमेशा अच्छी बातें बोलनी चाहिए अथवा चुप रहना चाहिए." (Bukhari, Muslim)


"जिसने मुस्लिम राष्ट्र में किसी ग़ैर-मुस्लिम नागरिक के दिल को ठेस पहुंचाई, उसने मुझे ठेस पहुंचाई." (Bukhari)

"जिसने एक मुस्लिम राज्य के गैर-मुस्लिम नागरिक के दिल को ठेस पहुंचाई, मैं उसका विरोधी हूँ और मैं न्याय के दिन उसका विरोधी होउंगा." (Bukhari)

"न्याय के दिन से डरो; मैं स्वयं उसके खिलाफ शिकायतकर्ता रहूँगा जो एक मुस्लिम राज्य के गैर-मुस्लिम नागरिक के साथ गलत करेगा या उसपर उसकी जिम्मेदारी उठाने की ताकत से अधिक जिम्मेदारी डालेगा अथवा उसकी किसी भी चीज़ से उसे वंचित करेगा." (Al-Mawardi)

"अगर कोई किसी गैर-मुस्लिम की हत्या करता है, जो कि मुसलमानों का सहयोगी था, तो उसे स्वर्ग तो क्या स्वर्ग की खुशबू को सूंघना तक नसीब नहीं होगा." (Bukhari).



एवं पवित्र कुरआन में ईश्वर कहता है कि:

इसी कारण हमने इसराईल की सन्तान के लिए लिख दिया था, कि जिसने किसी व्यक्ति को किसी के ख़ून का बदला लेने या धरती में फ़साद फैलाने के के जुर्म के अतिरिक्त किसी और कारण से मार डाला तो मानो उसने सारे ही इंसानों की हत्या कर डाली। और जिसने उसे जीवन प्रदान किया, उसने मानो सारे इंसानों को जीवन प्रदान किया। उनके पास हमारे रसूल (संदेशवाहक) स्पष्‍ट प्रमाण ला चुके हैं, फिर भी उनमें बहुत-से लोग धरती में ज़्यादतियाँ करनेवाले ही हैं [5:32]

- शाहनवाज़ सिद्दीकी

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47 comments:

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Tum unki gardane utaro, aur unke por-por par chot pahunchawo , ye bhi likha hai kuran main, iske bare main kya kahenge.

सलीम ख़ान ने कहा…

ek bar punh aapne sabit kar diya ki aap islam ke eksachche SIPAHI hai

Dr. Ayaz ahmad ने कहा…

बहुत अच्छा शाहनवाज़ भाई @गिरी साहब आप सचमुच समझना चाहते है क़ुरआन शरीफ़ को तो ठीक तरह से पढ़े ये बेवकूफ़ो की तरह बीच मे से उठाकर सवाल न करेँ आपको वैसे इसका जवाब भी मिलेगा

Shah Nawaz ने कहा…

@ Tarkeshwar Giri ji

Tum unki gardane utaro, aur unke por-por par chot pahunchawo , ye bhi likha hai kuran main, iske bare main kya kahenge.

तारकेश्वर जी, आपके प्रश्न का उत्तर तो मैं पहेले ही दे चूका हूँ. शायद आपने ध्यान नहीं दिया. फिर भी आपके ध्यानाकर्षण के लिए फिर से लिख देता हूँ.

इस्लाम यह अनुमति अवश्य देता है कि अगर ग़ैर-मुस्लिम मुसलमानों के खिलाफ युद्ध का एलान करें, उनको उनके घर से बेदखल कर दें अथवा इस तरह का कार्य करने वालो की मदद करें, तो ऐसी हालत में मुसलमानों को अनुमति है ऐसा करने वालो के साथ युद्ध करे और उनकी संपत्ति जब्त करें.

Shah Nawaz ने कहा…

अब तो आपको पता चल ही गया होगा कि इस्लाम किसके साथ युद्ध करने का हुक्म देता है. अगर कोई मेरे घर अथवा मेरे देश पर आक्रमण करेगा तो मैं अवश्य ही कुरआन-ऐ-करीम का अनुसरण करते हुए उनकी गर्दने उतारूंगा और उनके पोर-पोर पर चोट पहुंचाऊंगा.

Shah Nawaz ने कहा…

तारकेश्वर जी, कम से कम अच्छी बातों का तो समर्थन कर दिया कीजिये. आपसे एक ब्लॉगर के नाते रिश्ता बन गया है, इसलिए कम से कम इतनी अपेक्षा तो की ही जा सकती है?

safat alam taimi ने कहा…

बड़ा अच्छा लेख प्रस्तुत किया शाह नवाज़ भाई आपने। लोगों को बस आपत्ति करना आता है समझने के इच्छुक हों तब ना...और विरोद्ध भी कर रहे हैं किसका... अपनी ही धरोहर का.

safat alam taimi ने कहा…

1. कुरआन शान्ति का संदेश देता है। इस्लाम का उद्देश्य पूरे संसार में शान्ति स्थापित करना है। इस्लाम हर धर्म का सम्मान करता है। क़ुरआन में इनसानी जानों का सम्मान इतना किया गया है कि उसने किसी एक व्यक्ति (चाहे उसका धर्म कुछ भी हो)की हत्या को सारे संसार की हत्या सिद्ध करता हैः जो कोई किसी इनसान को जबकि उसने किसी की जान न ली हो अथवा धरती में फसाद न फैलाया हो, की हत्या करे तो मानो उसने प्रत्येक इनसानों की हत्या कर डाला और जो कोई एक जान को ( अकारण कत्ल होने से) बचाए तो मानो उसने प्रत्येक इनसानों की जान बचाई”(सूरः माईदा आयत न0 32) और मुसलमान जिस नबी को अपनी जान से अधिक प्रिय समझते हैं वह प्रत्येक संसार के लिए दयालुता बन कर आए थे ” (हे मुहम्मद)हमनें आपको सम्पूर्ण संसार के लिए दयालुता बना कर भेजा है ” (सूरः अंबिया 107) मुहम्मद सल्ल0 के प्रवचनों में आता है ” जो कोई इस्लामी शासन में रहने वाले गैर मुस्लिम की हत्या कर दे वह स्वर्ग की बू तक न पाएगा” (सही बुख़ारी)
देखा! यह है इस्लाम की शिक्षा… और हम सब इसी पर 100 प्रतिशत विश्वास रखते हैं। एक मुस्लिम कभी किसी गैर-मुस्लिम को गैर-मुस्लिम होने के नाते किसी प्रकार का कष्ट नहीं पहुंचा सकता इसलिए कि वह जानता है कि हम सब एक ही माता पिता का सन्तान हैं।

safat alam taimi ने कहा…

2. ज़रा आप मुहम्मद सल्ल0 की आदर्श जीवनी का अध्ययन कर के देख लिजीए उनके शत्रुओं ने उनको और उनके अनुयाइयों को निरंतर 21 वर्ष तक हर प्रकार से सेताया, कितनों को जान से मार दिया, घर से निकाला लेकिन सब को सहन करते रहे यहाँ तक कि 21 वर्ष तक अत्याचार सहते सहते जब अन्त में मक्का पर विजय पा चुके तो सार्वजनिक क्षमा की घोषणा कर दी। जिसका परिणाण यह हुआ कि मक्का विजय के वर्ष उनके अनुयाइयों की संख्या 10 हज़ार थी तो दो वर्ष में ही एक अन्तिम हज के अवसर पर एक लाख चालीस हज़ार हो गई। क्यों वह सोचने पर विवश हुए कि जिस इनसान को हमने 21 वर्ष तक चैन से रहने नहीं दिया हम पर क़ाबू पाने के बाद हमारी क्षमा की घोषणा कर रहा है, मानो यह स्वार्थी नहीं बल्कि हमारी भलाई चाहता है।

zeashan zaidi ने कहा…

[60:8] अल्लाह तुम्हे इससे नहीं रोकता है कि तुम उन लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करो और उनके साथ न्याय करो, जिन्होंने तुमसे धर्म के मामले में युद्ध नहीं किया और ना तुम्हे तुम्हारे अपने घर से निकाला. निस्संदेह अल्लाह न्याय करने वालों को पसंद करता है.
+1

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

बहुत अच्छे से व्याख्या की है आपने.... सहमत हूँ... इस्लाम में न्याय का मार्ग उत्तम मार्ग है, यही लोगों को बताने की जरुरत है.

एक जानकारी चाहूँगा, यदि कोई मुस्लिम तमाम लिखी गयी बातें, कुराने-करीम या हदीश में से कुछेक बात नहीं मानता है (वो बात जो आज के परिस्थिति में अनुसरण करना संभव नहीं है) तब भी क्या वो मुसलमान कहलायेगा?

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

उपरोक्त, सन्दर्भ से एक बात तो स्पष्ट है, की बांग्लादेश, पाकिस्तान या ऐसे देश के सरकार(लोग) दोज़ख के भागी है. इस्लामी शासन के अंतर्गत, उन्होंने थोडा भी अन्याय किया तो वे स्वर्ग की खुशबू से वंचित रहेंगे.

Shah Nawaz ने कहा…

इसमें दो बातें हैं, एक तो यह कि अगर कोई उन बातों को सही नहीं मानता है, तो वह मुसलमान हो ही नहीं सकता है. दूसरी यह कि अगर कोई किसी वजह से किसी बात को मानने में अक्षम हो, तो वह इस्लाम से ख़ारिज नहीं होता है. जैसे कि इस्लाम में पांच समय नमाज़ पढना फ़र्ज़ है, इसमें अगर कोई पांच समय नमाज़ नहीं पढ़ पाता है तो वह केवल नमाज़ छोड़ने का गुनाहगार है, हो सकता है कि ईश्वर उसके इस गुनाह को माफ़ करदे या फिर उसकी सजा उसे दे. लेकिन वह इस गुनाह की वजह से वह इस्लाम से बाहर नहीं होता है.

सुलभ § सतरंगी ने कहा…


@शाहनवाज जी,
त्वरित जवाब लिखने के लिए आपका शुक्रिया ! कुछ ऐसी ही बाते हमारे उस्ताद ने भी बताई थी जैसे सफ़र में हों तो रोज़ा रखना जरुरी नहीं है इत्यादि.... मेरे अधिकाँश दोस्त मुस्लिम ही हैं मगर वे इस्लाम के बारे में शुन्य या थोड़ी जानकारी रखते हैं. ठीक उसी प्रकार अधिकाँश हिन्दू विभिन्न रिवाज, नियम और ग्रंथों के बारे में सही जानकारी नहीं रखते.

बहरहाल, आप तो हम जैसे नास्तिकों को "काफिर" समझते हैं... जबकि मैं मानवता का सेवक हूँ. मेरी समस्या एक ही है, किसी भी धर्मग्रन्थ में आस्था नहीं है.... हाँ कुछ अच्छी बाते जरुर उठा लेता हूँ सभी किताबों से... जैसे मैंने कुरआन/हदीश से एक पंक्ति लिया "अमानत में खयानत नहीं करनी चाहिए". पुराने वेद से लिया "सर्व धर्म समभाव", "वसुधैव कुटुम्बकम", गीता से लिया "परिवर्तन संसार का नियम है" इत्यादि इत्यादि और इसे गाँठ बाँध लिया.

मुझे विश्वाश है, कुरआन या अन्य अच्छे धर्म ग्रन्थ का पालन किये बगैर भी मैं अच्छी जिंदगी बसर कर सकता हूँ, सबको साथ लेकर चल सकता हूँ. इसके लिए मुसलमान कहलाना जरुरी नहीं है.
मैं अपने देश से इतर किसी धर्म को नहीं मानता हूँ, यही मेरी सुन्दरता का राज है. लेकिन जिद्दी लोगों को समझाना अपना फ़र्ज़ (नागरिक धर्म) समझता हूँ.

SHIVLOK ने कहा…

शाहनवाज़ जी अपने इतना अच्छा लिखा ,
ये सब बातें सलीम ख़ान को भी समझाइये
सलीम ख़ान ने महफूज भाई की एक पोस्ट पर टिप्पणी की ये बहुत अच्छी टिप्पणी थी | इस टिप्पणी की तो मैं तारीफ करता हूँ परंतु इससे पहले ये कुछ ऐसा कर चुके हैं जो ठीक नहीं | इनको समझाइये और इनका थोड़ा विकास कीजिए | इनकी टिप्पणी के जवाब में मैने महफूज के ब्लॉग पर टिप्पणी की है आपकी जानकारी के लिए उसे यहाँ जस का तस दे रहा हूँ :-

@ saleem khan
"very nice

please provide me a T-SHIRT. Please..............."

सलीम तुम एक काम करो
महफूज भाई के कुत्ते की तस्वीर एक टी शर्ट पर छपवा कर पहनो तुम बहुत सुंदर लगोगे
poem वाली टी शर्ट पहनने के लायक तो तुम अभी नहीं हो |
वैसे मैं यह दिल से चाहता हूँ
कि तुम अपना विकास करो
प्यार करना सीखो हम भी तुमसे बहुत प्यार करना चाहते हैं
poem वाली टी शर्ट पहनने के लायक बनो
सबसे प्यार करो प्यार मिलेगा | नफ़रत करोगे तो नफ़रत चाहे ना मिले लेकिन प्यार नहीं मिलेगा |
सबसे पहले अपने ब्लॉग से महफूज की कुत्ते वाली फोटो हटाओ
फिर माफी माँगो | माफी मांगने से तुम छोटे आदमी नहीं बन जाओगे |
अपनी ग़लतियों को स्वीकार करना सीखो बहुत आनंदित हो जाओगे|
SHIV RATAN GUPTA
9414783323

vedvyathit ने कहा…

aap khoob bhrm faila rhe hain aisa islam me nhi hai aap aadhi jankari de kr logon kobhrmit kr rhe hai
phle aap poora kuran shrif dhyan se pdhe tb bat kren
dhokha jor jbr dsti loot ka mal islam me sb jayj hai
dr.ved vyathit

tahoor rocks ने कहा…

Peace be wid u all......

@ ved vyathit...

lagta hai apko quran ki bahut knwledge hai bhai jo aap salah de rahe hai acche se samajh kar padne ki...

pehle apne VED PURAN etc to pad lijiye acche se jakar wo khud hi itne hai ki koi aadmi dusra dharmgranth padna to door apne hi granth nahi pad paega.....

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

अरे वेद व्यथित जी ! अभी आप ब्लॉग जगत में घूम रहे हैं . हमारे सवाल का जवाब तो अपने आज तक न दिया . क्यूँ ?
लो आज कि पोस्ट में वैदिक वैज्ञानिकों कि खोज देखो .

http://vedquran.blogspot.com/2010/04/falsehood-of-love-jihad.html

Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…

nice post हमारी अन्‍जूमन को आप पर फखर है, अन्‍जुमन के दोस्‍तों भाई शाहनवाज के सौजन्‍य से www.islamhindi.com पर काम शुरू हो गया है, भाई नवाज को दुआओं और मशवरों से नवाजें

sahespuriya ने कहा…

NICE POST

Akhtar Khan Akela ने कहा…

jnaab asslaamo alekum, aadaab arz he , saadr vnde nmste st shri kaal , aap ne anjumn ke zriye jo koshishen ki hen use allah god bhgvaan kaamyaab kre or isi koshish se mulk se nfrt kaa bhaav door hoke bhaai chaaraaa sdbhaavna ka mahol bnskegaa. akhtar khan akela kota rajasthan

zeal ने कहा…

Blog author must respond with patience and tranquility.


A friendly tone will be appreciated.

Why so bitter and hostile?

Shah Nawaz ने कहा…

@ सुलभ § सतरंगी
उपरोक्त, सन्दर्भ से एक बात तो स्पष्ट है, की बांग्लादेश, पाकिस्तान या ऐसे देश के सरकार(लोग) दोज़ख के भागी है. इस्लामी शासन के अंतर्गत, उन्होंने थोडा भी अन्याय किया तो वे स्वर्ग की खुशबू से वंचित रहेंगे.


आप बिलकुल सही कह रहे हैं, चाहे कोई सरकार हो अथवा व्यक्ति, जिसने भी किसी पद पर होते हुए अन्याय किया वह नरक का भोगी है. और जिसने न्याय किया उसका दर्जा इस्लाम के अनुसार सबसे ऊपर है.

Shah Nawaz ने कहा…

@ vedvyathit

aap khoob bhrm faila rhe hain aisa islam me nhi hai aap aadhi jankari de kr logon kobhrmit kr rhe hai
phle aap poora kuran shrif dhyan se pdhe tb bat kren
dhokha jor jbr dsti loot ka mal islam me sb jayj hai
dr.ved vyathit


वेड व्यथित जी, इसमें भ्रम वाली कोई बात बाकी ही नहीं रही है. क्योंकि मैंने (हमेशा की तरह) कुरआन की आयतों (श्लोकों) को सबूत के तौर पर लिखा है. और मैं दावे के साथ कह रहा हूँ कि धोखा, जोर-ज़बरदस्ती, लूट का माल जैसी चीज़ें इस्लाम में जायज़ नहीं है.

Shah Nawaz ने कहा…

@ zeal
मेरी तो धारणा ही यही है कि इंसान को हमेशा मधुर वाणी का प्रयोग करना चाहिए, ताकि बात के महत्त्व का पता चल सके.

zeal ने कहा…

Shah nawaz` bhai-

Kuchh prash jehan ko pareshaan karte hain, aapki izazat ho to agli tippani mein puchhon?

Shah Nawaz ने कहा…

आप बिलकुल मालूम कर सकते हैं! अगर मैं उनका उत्तर देने का सामर्थ्य रखता होऊंगा तो अवश्य दूंगा.

zeal ने कहा…

Shah Nawaz bhai-

izazat dene ka shukriya...dar-dar ke ye prashn puchh rahi hun---

1- why it is said in Islam to take revenge if someone beats or hurts you.?...Don't you think it promotes 'hinsa'?

2-why most of the terrorists all over the world are muslim?

3-you are a blogger, why do you write something related with religion....Don't you think it divides us?.

4- Don't you think that our religion should be humanity?

5- If you are an Indian then be secular !...why advocating Islam sitting in Hindi blogs?....Don't you have better topics to write about?

6-Don't you think , time is changing and the world is going Global . So why don't you feel like mixing well with your fellow Indians, irrespective of their religion?

7-Why Islam allows polygamy?...Its an outright insult of a woman !..For their physical pleasure they marry with many women. Can you imagine how disgusting it will look if a lady starts marrying many men in your religion?

8- Fatwa- Why They issue Fatwa to sensible people who try to raise voice against anything wrong happening in Islam?

9-Talak-...A lady committed to her husband for her entire life can be given Talak by repeating it merely three times?....Don't you think a woman also should be given any such right and be treated as equal?

10- I have heard that higher education is not allowed in Islam for women. Is that true?....If it is so, it must be condemned.

11- Why do you need to advocate your religion so much?....Don't you believe in live and let live?

Shah Nawaj bhai...Time has changed...We need to change with time to rise high .

PS- By the way,i am not a male...I am a lady named Divya.

Thanks !

Shah Nawaz ने कहा…

@ zeal
izazat dene ka shukriya...dar-dar ke ye prashn puchh rahi hun---

दिव्या जी, इसमें डरने की क्या बात है? अगर किसी को भी कोई संदेह अथवा प्रश्न है, तो उसे मालूम करने का पूरा हक है, बशर्ते की मर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए मालूम किया जाए.

1- why it is said in Islam to take revenge if someone beats or hurts you.?...Don't you think it promotes 'hinsa'?

इस्लाम बदले को कभी भी प्रोत्साहन नहीं करता है, हाँ अगर बात न्याय की हो तो अलग बात है. अर्थात अगर कोई न्यायधीश न्याय करता है तो अलग बात है.

मेरे गुरु मुहम्मद (स.) ने बतलाया कि (जिसका अर्थ है) "दूसरों पर अपने हक को हमेशा अदा करते रहा करो वहीँ अपने ऊपर दूसरों के हक को माफ़ करते रहा करो.

वही दूसरी तरफ यह फ़रमाया कि "अगर किसी ने दुसरे की बुरी बातों के बदले में अच्छी बातें की तथा ताल्लुक तोड़ने वालों से ताल्लुक जोड़ा तो मैं ज़िम्मेदारी लेता हूँ कि जन्नत (स्वर्ग) उस पर वाजिब (ज़रूरी) हो गई."

Shah Nawaz ने कहा…

2-why most of the terrorists all over the world are muslim?


ऐसा कहना पूर्णत: सत्य नहीं है. आज भी विभिन्न देशों में विभिन्न पंथो के लोग आतंकवाद में लिप्त हैं.

परन्तु फिर भी जो आतंकवाद आज मुस्लिम समाज में पनप रहा है वह चिंता का विषय है. दर-असल इसके पीछे लम्बी कहानी है. अमेरिका और इस्राईल जैसे देश एवं कुछ सांप्रदायिक संगठन काफी सालों से कुछ मुस्लिम देशो / समाज को समाप्त अथवा पराजित करने जैसी कोशिश में लगे हुए हैं. इससे एक कशमकश की स्थिति बन गई है और इस कारण मुस्लिम युवाओं में एक असंतोष की भावना घर कर रही है और इसी का फायदा आतंकवादी संगठन उठा रहे हैं.

वहीँ अशिक्षा और बेरोज़गारी भी इसका एक महत्त्वपूर्ण कारण है. अशिक्षा के कारणवश बहुत ज्यादा मुसलमानों को मालूम ही नहीं है, कि इस्लाम की क्या शिक्षाएं हैं. और इसी का फायदा उठा कर आतंकवादी संगठन लोगो को बेवक़ूफ़ बना कर अपनी योजनाओं में शामिल कर लेते हैं.

Shah Nawaz ने कहा…

3-you are a blogger, why do you write something related with religion....Don't you think it divides us?.

अगर आपको किसी बात की जानकारी है, और अगर कोई उक्त बात पर प्रश्न करे या उसको गलत तरीके से अथवा उसकी जगह कोई झूट बात फैला कर लोगो को भ्रमित करने की कोशिश करे, तो आपका फ़र्ज़ बनता है कि सही जानकारी को लोगो को बताया जाए ताकि झूट और मिथ्या भ्रम समाप्त हो.

आज अनेको झूटी बातें और मिथ्या भ्रम हमारे देश मैं फैलाये जा रहे हैं. और इसी कारण आपस में दूरियां बढ़ रही हैं. जो मेरे विचार से तो झूट और भ्रम को समाप्त करके आपस में प्रेम और सौहार्द का वातावरण तैयार करना ही सच्चा देश प्रेम है.

वैसे भी अगर आपको किसी बात की जानकारी है आपको लगता है कि वह बात दूसरों के लिए फायदेमंद है, तो आप अवश्य चाहेंगे कि वह बात दूसरों को पता चले. हाँ यह अवश्य है कि यह दूसरों पर छोड़ देना चाहिए, कि वह उक्त बात को सही माने अथवा नहीं.

हमारा सामाजिक बातों पर लिखने का प्रयास भी यही होता है, कि समाज को फायदा पहुंचे. आप चाहे तो सामाजिक विषयों पर मेर ब्लॉग देख सकती हैं.

http://premras.blogspot.com

zeal ने कहा…

shukriya !

Kautilya ने कहा…

कुरआन के सामान्य अध्ययन से ही यह बात पता चल जाती है कि कुरआन में स्थान-स्थान पर इस्लामविरोधियों व इस्लामद्रोहियों को मार डालने का आदेश दिया गया है। काफिरों से निरंतर युध्द जारी रखने और उन्हें देखते ही मार डालने का आदेश कुरआन में आम है। इसके लिए प्रेरणा के रूप में जन्नत का प्रलोभन दिया गया है। जन्नत में उन्हें हूरें मिलने की आशा दिखाई जाती है। इसके बारे में प्रसिध्द विद्वान अनवर शेख ने अपनी पुस्तकों में काफी कुछ लिखा है। यहां उसके कुछ उध्दरण प्रस्तुत हैं। इन उध्दरणों में अनवर शेख ने इस्लाम के सिध्दांतों में व्याप्त हिंसा और उसकी प्रेरणा देने के लिए दिए जाने वाले प्रलोभनों का वर्णन किया है। यहां मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैंने स्वयं भी व्यक्तिगत रूप से कुरान का अध्ययन किया है और इन आयतों को इसी रूप में वहां पाया है।

इस्लाम ही एक ऐसा धर्म है जिसने मानव समाज को दो स्थायी पारस्परिक युठ्ठ करने वाले समूहों में बाँट रखा है। इनमें से जो अल्लाह और पैगम्बर मुहम्मद में विश्वास करते हैं, वे अल्लाह की पार्टी वाले कहलाते हैं और जो ऐसा नहीं मानते हैं, वे शैतान की पार्टी वाले हैं (58:19,22)। इनमें से पहले वर्ग वालों का सबसे पवित्रतम कर्त्तव्य यह है कि वे दूसरे वर्ग वालों को पराधीन करके समाप्त कर दें। यह उद्देश्य इतना आवश्यक है कि उसके लिए इस्लाम अपने अनुयायियों को न केवल गैर-ईमान वालों की हत्या, लूट और उनकी स्त्रियों को पराधीन करने को उत्साहित करता है, बल्कि इस प्रकार की हत्या, लूट और शील भ्रष्टीकरण को सबसे बड़ा पुण्य कार्य तक घोषित करता है। इस्लाम इसे ‘जिहाद’ कहता है जोकि किसी मुजाहिद (इस्लाम का पवित्र सैनिक) को उद्धार और ‘जन्नत’ में स्थान देने की गारंटी देता है।
अपने अनुयायियों को निर्दयी लुटेरा बनाने के लिए, वह उन्हें बार-बार अपने संभावित पीडितों यानी गैर-मुसलमानों के प्रति घृणा पैदा करने के लिए प्रेरित करता है।
1. ”निश्चय ही (भूमि) पर चलने वाले सबसे बुरे जीव अल्लाह की दृष्टि में वे लोग हैं जिन्होंने ‘कुफ्र’ किया फिर वे ‘ईमान’ नहीं लाते”। (इस्लाम नहीं स्वीकारते) (8:55)।
2. ”तो इन काफ़िरों पर अल्लाह की फिटकार है”। काफ़िरों (गैर-मुसलमानों) के लिए अपमानित करने वाली यातना है।” (2:89-90)
3. ”जो काफ़िर हैं, जालिम वही हैं”। (2:254)
4. ”हे ईमानवालो! उन काफ़िरों से लड़ो जो तुम्हारे आस-पास हैं और चाहिए कि वे तुम में सख्ती पाएँ।” (9:123)
5. ”किताब वाले” (यहूदी-ईसाई) जो न अल्लाह पर ईमान लाते हैं और न अन्तिम दिन पर और न उसे ‘हराम’ करते हैं जिसे अल्लाह और उसके ‘रसूल’ ने हराम ठहराया है और सच्चे ‘दीन’ को अपना दीन बनाते हैं उनसे लड़ो यहाँ तक कि वे अप्रतिष्ठित होकर अपने हाथ से ज़िज़िया देने लगें।” (9:29)
क्योंकि यह लूट ही थी कि जिसके परिणामस्वरूप इस्लाम का प्रसार हुआ, यहाँ तक कि जिन चीज़ों को स्वयं पैगम्बर ने पवित्र घोषित किया, उनकी मान्यता समाप्त हो गई, जब वे बातें उन्हें असुविधाजनक लगीं। उदाहरण के लिए
”जब हराम (पवित्र) महीने बीत जाएँ तो मुशरिकों को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो और उन्हें पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घात की जगह उनकी ताक में बैठो। फिर यदि वे तौबा कर लें और ‘नमाज’ कायम करें और ज़कात दें तो उनका मार्ग छोड़ दो।” (9:5)
”क्या तुम ऐसे लोगों से नहीं लड़ोगे जिन्होंने अपनी कसमों को तोड़ा और ‘रसूल’ को निकाल देने की फिक्र की और उन्होंने ही तुमसे पहले छेड़ भी की। क्या तुम उनसे डरते हो? यदि तुम ‘ईमान’ वाले हो तो अल्लाह इस बात का ज्यादा हकदार है कि उससे डरो। उनसे लड़ो! अल्लाह तुम्हारे हाथों उन्हें यातना देगा, और उन्हें रुसवा करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी सहायता करेगा और ‘ईमान’ वाले लोगों के दिल ठण्डे करेगा” (9:13-14)
”हे नबी! ‘ईमानवालों’ को लड़ाई पर उतारो। यदि तुम में बीस जमे रहने वाले होंगे तो वे दो सौ पर प्रभुत्व प्राप्त करेंगे। और यदि तुम में सौ हों तो वे एक हजार काफ़िरों पर भारी रहेंगे।” (8:65)

इस बात की सच्चाई की पुष्टि निम्नलिखित हदीस से होती है
”मुझे (काफ़िरों) लोगों से तब तक युद्ध करने की आज्ञा दी गई है जब तक कि वे यह स्वीकार न करें कि अल्लाह के सिवा अन्य कोई पूज्य नहीं है और (मुहम्मद) को अल्लाह का पैगम्बर न माने; और जब वे ऐसा कर लें तो उनका जीवन परिवार (सहित) और सम्पत्ति की मेरी ओर से सुरक्षा की गारंटी है, इसके अलावा जो भी कानूनन सही हो”। (सहीद मुस्लिम खंड 1 : 31 पृ. 20-21)

SUHAIL ने कहा…

sha nwaz shaib apko inke swalo ka jwab de na chiye, halanke mujhe maloom he ke inke swalo ka jwab inke paas he ya inhone khi se copy krke pest kiye he, lekin inko her baar jawab milna chaye take or logo ko bhi yhe jwab yaad ho jaye, jese yhe swalo ko pest kre to hum jwab de pta nhhi kab allha inhe tofeeq de de kyo he na?

SUHAIL ने कहा…

wese kotiylya g ager aap india ki nyey vyestha pedhge to aap usme phasi ki saza paane wale vyekti ko iss prkar vernit payege ki..........admi ke mukh per kala kapda daal do phir useke gle me rassa daal do or uske pran nhai ud jai jab tak usko hava me latka do , ager uske pran jab bhi nhi nikle to use phir marne ki vevstha kro.
kyo or ager sirf ise hi koi videhi pedhga to who apko yhi bteyga ki aap ki savdhan me to badi khternaak baate likhi he to aap yhi jwab denge na ki ehe moorekh tu pura swidhan ped kr baat kyou nhai krta,or aap man hi men us aadmi per hesege he na?

Kautilya ने कहा…

sanvidhan mein fansi dene ki vyavastha di hai, uska process nahi likha. Dusari baat yah hai ki fansi ki saza kisko? sanvidhan mein kisi kafir yani ki kisi dharm vishesh ko nahi manane wale ya fir butparasto ko fansi ki saza dene ke liye nahi likha hai. sawal fansi ki saza dene ya kisi ko marane ka order dene ka nahi hai, sawal yah hai ki kisi ko kewal isliye mar dalne ka order diya jai kyuki vah aapke dharm ko nahi manata hai, yah kitna sahi hai? Islam apne virodhiyon ko mar dalne ka aadesh deta hai aur yahi pure sansar mein aatankvad ke failane ka karan hai.

shakir khan ने कहा…

ek baat dhayn dijiye har gair muslim kaafir nahi hota . kafir wah hota hai jis tak ha pahunch jaye aur uska dil tasdik kar de yaani man le lekin wah apne ghamand ki wajah se apne aap ko sahi sabit karne ke liye iska inkaar kar de ..... ek aur khas baat yah dil ki baat hai ise khuda se bahtar koi nahi janta ke kaun kafir hain aur kaun momin .. kewal khuda hi unke man ka haal janta hai ya fir we khud
from: shakirkhansaifi@gmail.com

अमन का पैग़ाम ने कहा…

एक अच्छा लेख़ और सही पैग़ाम.

S.M.MAsum ने कहा…

एक बेहतरीन लेख़. तारकेश्वर जी कुरान को कुरान से सीखो , अफ्वाहूँ से नहीं.

ASHOK BORSE ने कहा…

शाहनवाज साहब, कुरान के विषय में आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है। कोई भी धर्म नफरत करना नहीं सिखाता है। आपसे उम्मीद है की कुरान के दूसरे विषयो के
( जैसे स्रियों के विषयो में, युवाओ के विषय में आदि)
बारे में भी लिखे। जिस से समाज के हर वर्ग को प्रेरणा मिल सके। धन्यवाद।

Unknown ने कहा…

क्या यह सच है कि मोहम्मद साहब ने अपनी ही बेटी से निकाह किया था

Roshan Maheshwari ने कहा…

क्या यह सच है कि मोहम्मद साहब ने अपनी ही बेटी से निकाह किया था

Roshan Maheshwari ने कहा…

मैंने सुना है कि कुरान में खतना का कोई जिक्र नहीं है तो फिर खतना क्यों जरूरी है क्या इस बात से यह नहीं लगता क्या खतना कुरान विरोधी है प्लीज़ बताएं

Nafees Malik ने कहा…

इस्लाम को आंतकवादी बोलते हो। जापान मे तो अमेरिका ने परमाणु बम गिराया लाखो बेगुनाह मारे गये तो क्या अमेरिका आंतकवादी नही है। प्रथम विश्व युध्द मे करोडो लोग मारे गये इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या अब भी मुस्लिम आंतकवादी है। दूसरे विश्व युध्द मे भी लाखो करोडो निर्दोषो की जान गयी इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या मुस्लिम अब भी आंतकवादी हुए अगर नही तो फिर तुम इस्लाम को आंतकवादी बोलते कैसे हो। बेशक इस्लाम शान्ति का मज़हब है।और हाॅ कुछ हदीस ज़ईफ होती है।ज़ईफ हदीस उनको कहते है जो ईसाइ और यहूदियो ने गढी है। जैसे मुहम्मद साहब ने 9 साल की लडकी से निकाह किया ये ज़ईफ हदीस है। आयशा की उम्र 19 साल थी। ये उलमाओ ने साबित कर दिया है। क्योकि आयशा की बडी बहन आसमा आयशा से 10 साल बडी थी और आसमा का इंतकाल 100 वर्ष की आयु मे 73 हिज़री को हुआ। 100 मे से 73 घटाओ तो 27 साल हुए।आसमा से आयशा 10 साल छोटी थी तो 27-10=17 साल की हुई आयशा और आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम ने आयशा से 2 हिज़री को निकाह किया।अब 17+2=19 साल हुए। इस तरह शादी के वक्त आयशा की उम्र 19 आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम की 40 साल थी।हिन्दुओ का इतिहास द्रोपती ने 5 पांडवो से शादी की तो क्या ये गलत नही है हम मुसलमान तो 4 औरते से शादी कर सकते है ऐसी औरते जो विधवा हो बेसहारा हो। लेकिन क्या द्रोपती सेक्स की भूखी थी। और शिव की पत्नी पार्वती ने गणेश को जन्म दिया शिव की पीछे। पार्वती ने फिर किस के साथ सेक्स किया ।इसलिए शिव ने उस लडके की गर्दन काट दी क्या भगवान हत्या करता है ।श्री कृष्ण गोपियो को नहाते हुए क्यो देखता था और उनके कपडे चुराता था जबकि कृष्ण तो भगवान था क्या भगवान ऐसा गंदा काम कर सकता है । महाभारत मे लिखा है कृष्ण की 16108 बीविया थी तो फिर हम मुस्लिमो को एक से अधिक शादी करने पर बुरा कहा जाता । महाभारत युध्द मे जब अर्जुन हथियार डाल देता तो क्यो कृष्ण ये कहते है ऐ अर्जुन क्या तुम नपुंसक हो गये हो लडो अगर तुम लडते लडते मरे तो स्वर्ग को जाओगे और अगर जीत गये तो दुनिया का सुख मिलेगा। तो फिर हम मुस्लिमो को क्यो बुरा कहा जाता है हम जिहाद बुराई के खिलाफ लडते है अत्यचारियो और आक्रमणकारियो के विरूध वो अलग बात है कुछ लोग जिहाद के नाम पर बेगुनाहो को मारते है और जो ऐसा करते है वे ना मुस्लिम है और ना ही इन्सान जानवर है। राम और कृष्ण के तो मा बाप थे क्या कोई इन्सान भगवान को जन्म दे सकता है। वेद मे तो लिखा है ईश्वर अजन्मा है और सीता की बात करू तो राम तो भगवान थे क्या उनमे इतनी भी शक्ति नही थी कि वे सीता के अपहरण को रोक सके। राम जब भगवान थे तो रावण की नाभि मे अमृत है ये उनको पहले से ही क्यो नही पता था रावण के भाई ने बताया तब पता चला। क्या तुम्हारे भगवान राम को कुछ पता ही नही कैसा भगवान है ये। और इन्द्र देवता ने साधु का वेश धारण कर अपनी पुत्रवधु का बलात्कार किया फिर भी आप देवता क्यो मानते हो। खुजराहो के मन्दिर मे सेक्सी मानव मूर्तिया है क्या मन्दिर मे सेक्स की शिक्षा दी जाती है मन्दिरो मे नाच गाना डीजे आम है क्या ईश्वर की इबादत की जगह गाने हराम नही है ।राम ने हिरण का शिकार क्यो किया बहुत से हिन्दु कहते है हिरण मे राक्षस था तो क्या आपके राम भगवान मे हिरण और राक्षस को अलग करने की क्षमता नही थी ये कैसा भगवान है।हमे कहते हो जीव हत्या पाप है मै भी मानता हू कुत्ते के बेवजह मारना पाप है । कीडी मकोडो को मारना पाप है पक्षियो को मारना पाप है।

Nafees Malik ने कहा…

और राम या हनुमान ने राम सेतु पुल बनाया था सीता को बचा के लाने के लीए । जब भगवान थे तो पुल बनाने की क्या जरुरत थी उड की नही जा सकते थे। ये एक किस्म की चूतियापंती है और हिन्दु क्या बोलते है कि सारे भगवान मनुष्य के रुप मे थे इसलिए उड के जाने की ताकत नही थी। ये हिन्दु अपनी ही चट करते है और अपनी ही पट। जब मनुष्य के रुप मे भगवान थे। इसका मतलब ये हुआ वे मनुष्य ही भगवान थे । और भगवान उसे कहते है जो कुछ भी कर सकते है तो फिर वे मनुष्य उड क्यो नही सकते थे क्योकि आप लोग तो उनको एक तरीके से भगवान ही मानते हैऔर ब्रहम्मा ने अपनी पुत्री से सेक्स किया था इसलिए हिन्दु ब्रहम्मा की पूजा नही करते है। ब्रहम्मा भी तो आपके भगवान थे भगवान बल्तकार करता है क्या। ये सब आपकी किताबो मे लिखा है। और राम ने अपनी पत्नी सीता की व्रजिन की परीक्षा लेने के लिए घर से बाहर निकाला था। तो क्या औरत को यूही कही भी धक्के दिये जा सकते है। कहने को राम भगवान थे औरत की इज्जत आती नही थी। हमे कहते हो मांस क्यो खाते हो लेकिन ऐसे जानवर जिनका कुरान मे खाना का जिक्र है खा सकते है क्योकि मुर्गे बकरे नही खाऐगे तो इनकी जनसख्या इतनी हो जायेगी बाढ आ जायेगी इन जानवरो की। सारा जंगल का चारा ये खा जाया करेगे फिर इन्सान के लिए क्या बचेगा। हर घर मे बकरे होगे। बताओ अगर हर घर मे भैंसे मुर्गे होगे तो दुनिया कैसे चल पाऐगी। आए दिन सिर्फ हिन्दुस्तान मे लाखो मुर्गे और हजारो कटडे काटे जाते है । 70% लोग मांस खाकर पेट भरते है । सब को शाकाहारी भोजन दिया जाये तो महॅगाई कितनी हो जाएगी। समुद्री तट पर 90% लोग मछली खाकर पेट भरते है। समझ मे आया कुछ शाकाहारी भोजन खाने वालो मांस को गलत कहने वाले हिन्दुओ अक्ल का इस्तमाल करो ।खैर हिन्दु धर्म मे शिव भगवान ही नशा करते है तो उसके मानने वाले भी शराबी हुए इसलिए हिन्दुओ मे शराब आम है ।डाक कावड मे ऊधम मचाते है ना जाने कितनो की मौत होती है रास्ते मे कोई मुसाफिर आये तो गाली देते है । जितने त्योहार है हिन्दुओ के सब बकवास। होली को देखलो कहते है भाईचारे का त्योहार है। पर शराब पिलाकर एक दुसरे से दुश्मनी निकाली जाती है।होली से अगले दिन अखबार कम से कम 100 लोगो के मरने की पुष्टि करता है ।अब दीपावली को देखलो कितना प्रदुषण बुड्डे बीमार बुजुर्गो की मोत होती है। पटाखो के प्रदुषण से नयी नयी बीमारिया ऊतपन होती है। गणेशचतुर्थी के दिन पलास्टर ऑफ पेरिस नामक जहरीले मिट्टी से बनी करोडो मूर्तिया गंगा नदियो मे बह दी जाती है। पानी दूषित हो जाता है साथ ही साथ करोडो मछलिया मरती है तब कहा चली जाती है इनकी अक्ल जीव हत्या तो पाप है।

Nafees Malik ने कहा…

हम मुस्लिमो को बोलते है चचेरी मुमेरी फुफेरी मुसेरी बहन से शादी कर लेते हो। इन चूतियाओ से पूछो बहन की परिभाषा क्या होती है मै बताता हू साइंस के अनुसार एक योनि से निकले इन्सान ही भाई बहन हो सकते है और कोई नही। तुम भाई बहन के चक्कर मे रह जाओ इसलिए हिन्दु लडको की शादिया भी नही होती अक्सर । हमारे गाव मे 300 हिन्दु लडके रण्डवे है। शादी नही होती उनकी गोत जात पात ऊॅच नीच की वजह से फिर उनका सेक्स का मन करता है वे फिर लडकियो महिलाओ की साथ बलात्कार करते है ये है हिन्दु धर्म । और सबूत हिन्दुस्तान मे अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा रेप होते है । किसी मुस्लिम मुल्क का नाम दिखा दो या बता दो बता ही नही सकते। तुम्हारे हिन्दुओ लडकियो को कपडे पहनने की तमीज नही फिटिंग के कपडे छोटे कपडे जीन्स टीशर्ट आदि पहननती है ।भाई बाप के सामने भी शर्म नही आती तुमको ऐसे कपडो मे थू ऐसे कपडो मे लडकी को देखकर तो सभी इन्सानो की ऑटोमेटिकली नीयत खराब हो जाती है इसलिए हिन्दु और अंग्रेजी लडकियो की साथ बलात्कार होते हे इसके लिए ये लडकिया खुद जिम्मेदार है।।और हिन्दु लडकियो के हाथ मे सरे आम इंटरनेट वाला मोबाइल उसमे इतनी गंदी चीजे।

तुम हिन्दु अपनी लडकियो को पढाते इतने ज्यादा हो जो उसकी शादी भी ना हो सके पढी लिखी लडकी को स्वीकार कौन करता है जल्दी से। पढने का तो नाम है घरवालो के पैसे बरबाद करती है और अय्याशी करती है। इन चूतियाओ से पूछो लडकी इतना ज्यादा पढकर क्या करेगी। मर्द उनके जनखे है जो औरत से कमवाऐगे और खुद बैठकर खाऐगे।सही कहू तो मर्दो की नौकरिया खराब करती है जहा मर्द 20 हजार रूपये महीने की मांग करे वहा लडकिया 2 हजार मे ही तैय्यार हो जाती है। सही कहू बेरोजगारी लडकियो को नौकरी देनी की वजह से है। और सालो तुम्हारा धार्मिक पहनावा क्या है साडी। जिसमे औरत का आधा पेट दिखता है। पेट छुपाने की चीज है या सबको दिखाने की बताओ । औरत की ईज्जत से खिलवाड खुद करते हो । और मर्दो क धार्मिक पहनावा क्या है धोती। जरा से हवा चलती है तो धोती एकदम उडती है। सारी शर्मगाह दिखाई देती है। शर्म नही आती तुम हिन्दुओ को। क्या ये तुम हिन्दुओ की असलियत नही है। और तुम्हारे सभी भगवान भी धोती के अलावा कुछ नही पहनते थे। बाकी सारा शरीर खुला रहता है
ये कैसे भगवान है जिन्हे कपडे पहनने की भी तमीज नही है।

Nafees Malik ने कहा…


हर धर्म की किताब मे लिखा हुआ है झूठ बोलना पाप है फिर भी तुम हिन्दु अपनी तरफ से हदीसे कुरआन की आयते सब झूठ क्यो लिखते है। आयत नम्बर हदीस नम्बर सब अपनी तरफ से झूठ लिख देते हो। शर्म नही आती तुम्हे। कयामत के दिन जब इंसाफ होगा तब तुम्हे झूठा इल्जाम लगाने का पता चल जायेगा । हद होती है हर चीज की। आपने काबे पर भी इल्जाम लगा दिया। वो अल्लाह का घर है। वहा पर नमाज पडी जाती है लिंग की पूजा नही होती। और क्या कहते हो तुम हमे काबे की सच्चाई सामने क्यो नही लाते हो। यूटयूब पर हजारो विडियो पडी हुयी है देख लो कोई लिंग विंग नही है वहा। बस जन्नत का एक गोल पत्थर है और हर पत्थर का मतलब लिंग नही होता। बाईचान्स मान लो वहा शिव लिंग है।तो क्या आपके शिव लिंग मे इतनी भी ताकत नही है जो वहा से आजाद हो सके। तुम्हारी गंदी नजरो मे सभी मुस्लिम अच्छे नही है इसलिए सारे मुस्लिमो को शिव मार सके। आप तो कहते हो शिव ने पूरी दुनिया बनाई तो क्या एक छोटा सा काम नही कर सकते।
इसलिए तो इन लिंग विंग पत्थरो के बूतो मे कोई ताकत नही होती। बकवास है हिन्दु धर्म।
हिन्दु गर्व के साथ कहते है कि हमारी गीता मे लिखा है कि ईश्वर हर चीज मे मौजूद है ।सब चीजे मे है इसलिए हम पत्थरो को पूजते है और भी बहुत सारी चीजो को पूजते है etc. लेकिन मै कहूगा इनकी ये सोच बिल्कुल गलत है क्योकि अगर हर चीज मे भगवान है तो क्या गू गोबर मे भी है आपका भगवान। जबकि भगवान या खुदा तो पाक साफ है तो दुनिया की हर चीज मे कहा से हुआ भगवान। इसलिए मै आपसे कहना चाहता हू भगवान हर चीज मै नही है बल्कि हर चीज उसकी है और वो एक है इसलिए पूजा पाठ मूर्ति चित्र सब गलत है।कुरान अल्लाह की किताब है इसके बताये गये रास्ते पर चलो। सबूत भी है क्योकि कुरान की आयते पढकर हम भूत प्रेत बुरी आत्माओ राक्षसो से छुटकारा पाते है।हमारी मस्जिद मे बहुत हिन्दु आते है ईलाज करवाने के लिए । और मौलवी कुरान की आयते पढकर ही सभी को ठीक करते है । इसलिए कुरान अल्लाह की किताब है । जबकि आप वेदो मंत्रो से दसरो को नुकसान पहुचा सकते है अच्छाई नही कर सकते किसी की और सभी भगत पंडित जादू टोना टोटके के अलावा करते ही क्या है। जबकि कुरान से अच्छाई के अलावा आप किसी के साथ बुरा कर ही नही सकते। इसलिए गैर मुस्लिमो अल्लाह पर ईमान लाओ

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