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आओ उस बात की तरफ़ जो हममे और तुममे एक जैसी है और वो ये कि हम सिर्फ़ एक रब की इबादत करें- क़ुरआन
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हे विश्वासियों! रोज़ा तुमहारे लिए निर्धारित है, Ramzan Ul Mubarak

Written By M.MAsum Syed on मंगलवार, 2 अगस्त 2011 | मंगलवार, अगस्त 02, 2011

हे विश्वासियों! रोज़ा तुमहारे लिए निर्धारित है, क्योंकि यह उन लोगों के लिए भी था जो तुम से पहले थे ताकि तुम बुराई से दूर रह सको!. रोज़े (उपवास) के दिन की एक निश्चित संख्या है ... (पवित्र कुरान अध्याय 2, छंद 18
आज हर जगह रमजान के आने से पहले की चहल पहल देखी जा सकती है.  मस्जिदों मैं रौनक पहले से ज्यादा बढ़ गए हैं लोगों ने सहर और इफ्तार का इंतज़ाम करना शुरू कर दिया है. आज शाम की अज़ान के बाद से अल्लाह की रहमत का महीना माह ए रमजान शुरू हो जाएगा और जो भी बन्दा ए खुदा हैं उनमें एक ख़ुशी की लहर सी दौड़ जाएगी. अपने किरदार को दुरुस्त करने और गुनाहों को माफ़ करवा लेने का महीना है यह.

rozaरमजान बरकतों का महीना है   . इसे अल्लाह का महीना कहा जाता है और हर इंसान इस महीने मैं अल्लाह की इबादतों, नेकियों और इंसानों की खिदमत कर के अल्लाह की कुर्बत पा लेना चाहता है. झूट फरेब, गीबत , जीना ,गुस्सा इत्यादि रूह की बिमारीयों से छुटकारा पाने का यह महीना है. इस महीने हर मुसलमान ३० दिन रोज़ा रख कर गरीबों की भूख और प्यास को महसूस करता है और दान दे के इस संसार मैं जितने भी गरीब हैं उनकी मदद करता है. इसलिए रमजा़न का उद्देश्य साधन सम्पन्न लोगों को भी भूख-प्यास का एहसास कराकर यह बताना है की देखो एक गरीब की भूख और प्यास कैसी  होती है? और जब इंसान इसे महसूस कर लेता है तो गरीबों की मदद खुद ही करने लगता   है.

ramzav_1रोजे़ रखने का असल मकसद महज़ भूख-प्यास पर नियंत्रण रखना नहीं है, बल्कि रोजे़ की रूह दरअसल आत्मसंयम, नियंत्रण, अल्लाह के प्रति अकीदत और सही राह पर चलने के संकल्प और उस पर मुस्तैदी से अमल में बसती है.
यह महीना इंसान को अपने अंदर झांकने और खु़द का मूल्यांकन कर सुधार करने का महीना है. इंसान दुनिया के पीछे भागता भागता रोजाना ना जाने कितने गुनाह किया करता है और उसका इतना आदी हो जाता है की उसको यह एहसास ही  नहीं होता की वो कितने गुनाह रोज़ किये जा रहा है. माहे रमजान मैं दिन मैं रोज़े के दौरान सभी गुनाहों से बचते हुए इंसान को अपना दिन निकलना निकाल कर  रोज़ा पूरा करना होता है और इसके लिए इंसान अपनी नफ्स को काबू करता है और यह एह सास करता है की उसने कितने गुनाह किये.रूह को पाख करने का नाम रमजान के रोज़े हैं.

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अल्लाह ने इसी माह में हिदायत की सबसे बड़ी किताब यानी कुरान शरीफ का दुनिया में उतारना  शुरू किया था. इसलिए इस महीने मैं अल्लाह अपनी रहमतों की बारिश करता है. हर मुसलमान को चाहिए की इस माहे रमजान मैं खुद को गुनाहों से दूर रखते हुए, पिछले गुनाहों  की तौबा करते हुए ,अल्लाह की कुर्बत हासिल करने की कोशिश करे और अपने गुनाहों को माफ़ करवा ले.
इंशाल्लाह इस हक और बातिल ब्लॉग से हिंदी पढने वालों के लिए पूरे रमजान दुआओं ,अमाल और कुरान की हिदायतों को आप सभी तक पहुँचाने की  कोशिश की जाएगी.

एक बार फिर से रमजान मुबारक ( २ औग २०११)
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